" यही मंदिर , यही मस्जिद , यही तख्ते मुहम्मद हैं

चले आओ 'बेदिल' यही वादी-ए-जन्नत है "

कल उनसे मुलाकात होनी है

>> रविवार, 30 अगस्त 2009

--->> "Hindi" <<---
आज-कल में उनसे मुलाकात होनी है
उनकी मोहोबत में दिन से रात होनी है

खुशिया दिलो की छः से सात होनी है
जब मुस्कुराकर बातो पर बात होनी है

बाहों में लेने का बहाना भी मिल जाए
गर् कड़के बिजली लगे बरसात होनी है

उनका हुस्न, उनके चहरे की मासूमियत
नाज-ओ-नखरे,तबाह कायेनात होनी है

दिल आवारा बंजारा पगला भी "बेदिल"
चंद अल्फाजो में उनकी क्या बात होनी है

Deepak "bedil"....

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-->> " Hinglish " <<--
Aaj Kal Me Unse Mulakaat Honi Hai
Unki Mohobat Me Din Se Raat Honi Hai

Khushiya Dilo Ki Che se Saat Honi Hai
Jab Muskuraa'kar Baato Par Baat Honi Hai

Baaho Me Lene Ka Bahaana Bhi Mil Jaaye
Gar Kadke Beej'li Lage Barsaat Honi hai

Unka Husan, Unke Chahre ki Masumiyat
Naaj-o-Nakhre, Tabaah Kaayenaat honi hai

Dil Awaara, Banjaara, Pagla Bhi "Bedil"
Chan'nd Alfaajo Me Unki Kya Baat Honi Hai

Deepak "bedil"

नोट - एजाज-ऐ-बेदिल में पहली बार हिन्दी के साथ आज कल की इन्टरनेट की भाषा हिंगलिश का भी पर्योग किया जा रहा है अपने उन साथियो के लिए जो ग़ज़ल को हिन्दी में नही पड़ सकते .

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Sahitya Shilpi
http://www.chitthajagat.in/?ping=http://ajaaj-a-bedil.blogspot.com/

घनिष्ट मित्र का तोफा

तोहमतें कई मेरे पीछे मुझपे लगाता है वो
खुलकर बात करने में मग़र शरमाता है वो

कभी सिखाया करता था भले-बुरे का भेद जो
आज खुद ही बुराई का शहंशाह कहलाता है वो

फाँस भी कोई अगर उसे कभी चुभ जाती थी
रोता था मेरे पहलू में, आज मुझे रुलाता है वो

मसलसल जलता रहा लौ बनके जिसके लिए
देखकर कर भी घाव मेरे पीठ दिखाता है वो

पढ़-पढ़कर आँखों में ख़्वाब पूरे किए थे जिसके
एक प्यार की हकीकत पे फूल देके बहलाता है वो


--अमित के सागर


अजीब शख्स था कैसा मिजाज़ रखता था
साथ रह कर भी इख्तिलाफ रखता था

मैं क्यों न दाद दूँ उसके फन की
मेरे हर सवाल का पहले से जवाब रखता था

वो तो रौशनियों का बसी था मगर
मेरी अँधेरी नगरी का बड़ा ख्याल रखता था

मोहब्बत तो थी उसे किसी और से शायद
हमसे तो यूँ ही हसी मज़ाक रखता था

--अहमद फराज़
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